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सुरुआत कर
POETRY

सुरुआत कर

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Bhoomi
September 27, 2026 · 1 min read · 34 views
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तू पहल कर, शुरुआत कर, ज़िद पूरी तू एक बार कर। औरों के लिए नहीं, खुद के लिए जी, पूरी कर अपनी हर एक खुशी। रोना नहीं, तू थक-हार कर, बस एक बार फिर शुरुआत कर।

तू पूरे कर अपने हर एक सपने, मुसीबत में ही पहचाने जाते हैं अपने। तू खुद पर काम कर, तू शुरुआत कर। ज़िद पूरी तू एक बार कर, तू शुरुआत कर।

तेरा आख़िरी पन्ना तू खुद लिखेगा, एक दिन गिरकर तू खुद उठेगा, खुद पर यकीन तू हर बार कर, फिर से अपनी शुरुआत कर।

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