
अंधेरी रात...
आज फिर वही अंधेरी रात लौट आई है, घाटी के ऊपर
एक चादर की तरह फैल गई।
आज अमावस्या है, आसमान पूरा चंद्रहीन है, बिना चांद के
सारा जंगल सुना सुना लग रहा हे।
घाटी मैं ऐसा मोन छाया है कि अपनी साँसों का शोर
भी सुनाई दे रहा है।
लोग कहते है कि एकांत सुख देता है, पर आज इस
एकांत ने मेरी बेचैनी और बढ़ा दी है ।
बाहर तो सिर्फ मोन और एकांत हे, पर मेरे मन के अंदर
विचारों का शोर और बेचैनी का सैलभ है।
इस चंद्रहीन रात में , इस अंधेरी रात में, मैंने सुना अंधेरा
बाहर नहीं मन के अंदर होता हैं