
उसकी हँसी सबसे अलग थी, पर वो बेवफ़ा थी...
वो मेरी सर्द रातों की धूप थी, मैं उसका मौसम समझ बैठा। उसकी बातें फूल थीं, पर काँटे किसी और के लिए बचा रखे थे।
मैंने उसके नाम से अपने कल की दीवारें रंग दीं, उसने किसी और के हाथों मेरी तस्वीर उतार दी।
अजीब था उसका जाना— दरवाज़ा बंद हुआ, पर उसकी हँसी भीतर रह गई।
उसकी हँसी सबसे अलग थी, पर वो बेवफ़ा थी...