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“कुछ ऐसा सा है मेरा यार”
POETRY

“कुछ ऐसा सा है मेरा यार”

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Bhoomi
September 30, 2026 · 1 min read · 5 views
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आज चाँद ज़रा ख़फ़ा है हमसे, छुप गया बदरी छाँव में, जबसे देखा यार का चेहरा, रह गया अकबकाव में।

पहले देखी मेरे यार की आँखें, हो गया आग बबूला, न देखी ऐसी आँखें, न देखे ऐसे बाल, देखते ही पूछने लगा एक सवाल— कौन है वो जिसने बनाया, ये कुदरत का कमाल?

फिर देखी उसकी मंद-मंद मुस्कान, तो अपना भी दिल गया हार, उसकी बातों में है कुछ ऐसी बात, कि मानो हर लफ़्ज़ में छुपा है कोई राज़।

वो पास हो तो लगता है आबाद, न हो तो सब बर्बाद, तो कुछ ऐसा सा है मेरा यार— जिसके बिना अधूरा सा लगता है मेरा संसार।

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