कितना वक्त हो गया खुद से मिले
एक लड़की थी जिसे मैं जानती थी,
चाहे उसमें दर्द ही क्यों न हो,
जो लिखती थी वो सब जो दिल में हो,
जो सुनती थी खुद की और रुकती थी
हाँ, वो थमने से नहीं डरती थी,
पर यह जिसके साथ आजकल रात-दिन गुज़ार रही हूँ मैं
यह चलती है, दौड़ती है, दूर चली जाती है
फिर उन्हीं यादों के घर में रुकने से जहाँ कभी रहा करती थी
सोचती है अगर संभाल नहीं सकी
और डूब गई फिर उन्हीं यादों के बवंडर में