
जैसे जब सूरज की रोशनी तेज़ चमकती है, तो मैं उसकी किरणों के नीचे खड़ा हो होती हूँ और आकाश में उकेरी गई सूरज की किरणों की हर छाप को महसूस करती हूँ
वैसे ही मै तुम्हे देखने में महसूस करने और याद करने की कोशिश करती हूँ।
और सबसे अजीब बात यह है कि जब मैं आखिरकार तुम्हे सबसे छिपना चाहती हूं और फिर भी बैठ जाती हूं लिखना शुरू, मुझे पता चलता है कि मेरे पास इसे छिपाने के लिए हर दिन झेलने वाले संघर्ष के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं है
मैं शायद छुपकर इस डायरी को लिखने की दोषी हूँ। लेकिन —ये सारी भावनाएँ—आखिर कहाँ जाएँगी? जब मैं किसी को कुछ बताने या किसी के साथ साझा करने के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे डर लगता है खुद को कैसे व्यक्त करूं ये सारी भावनाएँ—यहाँ के अलावा और कहाँ जाएँगी?
मेरी सुंदर डायरी लिखने का एक फ़ायदा यह है कि यह कभी मेरी जान मेरी जिंदगी
मेरी प्यारी डायरी प्रिय डायरी,
तुम सुन रही हो ना तुम मेरे लिए बहुत जरूरी हो ,
तुम मेरे हर दिन और विचारों के सम्मेलन में तुम शामिल हो
और मेरी सच्चाई से भी ज्यादा तुम कहीं अधिक रहस्य मय हो,तुम मेरे सपनो के धर्मग्रंथों और किताबों
से भी अधिक प्यारी हो मैं तुम्हारे बिना अपना कल्पना भी नहीं कर सकती तुम मेरी सच्ची दोस्त हो जो मुझे कभी
गलत नहीं समझती है ।
तुम्हारे बिना मेरा एक दिन भी नहीं गुजरता
मै खुद को तुम्हारे बिना सोच भी नहीं सकती हूँ शायद तुम मेरी जरूरत हो जब तक मैं इस दुनियां में रहूंगी तब तक तुम भी साथ रहोगी मेरे मुझे लगता हैं मैं तुम्हारे साथ ही खुद को असली रूप में पाती हूँ इस दुनियां में
कभी-कभी आपकी डायरी ही सबसे अच्छी श्रोता होती है
मैं अपनी डायरी को बिना कभी लिखे और पढ़े बिना कभी सो नहीं पाती हूँ रात में पढ़ने के लिए हमेशा कुछ न कुछ सच होना चाहिए। जो तुम हो मेरी डायरी
मुझे पता है इसमें लिखी छोटी-छोटी बातें अक्सर चाय की तरह मीठी नहीं होती हैं। इन्हें लिखना ऐसा है जैसे इन पर गर्म पानी डालकर इनकी खुशबू को बाहर निकालना।
मेरे पास 2 डायरी है, जैसे मेरी 2 बहने मैं डायरी में खुद को लिखती हूं मैं अपने आप को सच्चाई से उकेर देती हूँ जैसे जब सूरज की रोशनी तेज़ चमकती है, तो मैं उसकी किरणों के नीचे खड़ा हो होती हूँ और आकाश में उकेरी गई सूरज की किरणों की हर छाप को महसूस करती हूँ
वैसे ही मै तुम्हे देखने में महसूस करने और याद करने की कोशिश करती हूँ।
और सबसे अजीब बात यह है कि जब मैं आखिरकार तुम्हे सबसे छिपना चाहती हूं और फिर भी बैठ जाती हूं लिखना शुरू, मुझे पता चलता है कि मेरे पास इसे छिपाने के लिए हर दिन झेलने वाले संघर्ष के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं है
मैं शायद छुपकर इस डायरी को लिखने की दोषी हूँ। लेकिन —ये सारी भावनाएँ—आखिर कहाँ जाएँगी? जब मैं किसी को कुछ बताने या किसी के साथ साझा करने के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे डर लगता है खुद को कैसे व्यक्त करूं ये सारी भावनाएँ—यहाँ के अलावा और कहाँ जाएँगी?
मेरी सुंदर डायरी लिखने का एक फ़ायदा यह है कि यह कभी भी विषय नहीं बदलती, न ही आपके चुटकुलों को बेतुका समझती है, न ही आपको अपनी बड़ाई करते या शिकायत करते हुए देखती है। और यह कोई लिखने की प्रतियोगिता भी नहीं है, इसलिए कोई दबाव भी नहीं होता। डायरी बस आपको ईमानदार रहने देती है। और मुझे यह बात अच्छी लगती है। 😊भी विषय नहीं बदलती, न ही आपके चुटकुलों को बेतुका समझती है, न ही आपको अपनी बड़ाई करते या शिकायत करते हुए देखती है। और यह कोई लिखने की प्रतियोगिता भी नहीं है, इसलिए कोई दबाव भी नहीं होता। डायरी बस आपको ईमानदार रहने देती है। और मुझे यह बात अच्छी लगती है। मेरी जान मेरी जिंदगी
मेरी प्यारी डायरी प्रिय डायरी,
तुम सुन रही हो ना तुम मेरे लिए बहुत जरूरी हो ,
तुम मेरे हर दिन और विचारों के सम्मेलन में तुम शामिल हो
और मेरी सच्चाई से भी ज्यादा तुम कहीं अधिक रहस्य मय हो,तुम मेरे सपनो के धर्मग्रंथों और किताबों
से भी अधिक प्यारी हो मैं तुम्हारे बिना अपना कल्पना भी नहीं कर सकती तुम मेरी सच्ची दोस्त हो जो मुझे कभी
गलत नहीं समझती है ।
तुम्हारे बिना मेरा एक दिन भी नहीं गुजरता
मै खुद को तुम्हारे बिना सोच भी नहीं सकती हूँ शायद तुम मेरी जरूरत हो जब तक मैं इस दुनियां में रहूंगी तब तक तुम भी साथ रहोगी मेरे मुझे लगता हैं मैं तुम्हारे साथ ही खुद को असली रूप में पाती हूँ इस दुनियां में
कभी-कभी आपकी डायरी ही सबसे अच्छी श्रोता होती है
मैं अपनी डायरी को बिना कभी लिखे और पढ़े बिना कभी सो नहीं पाती हूँ रात में पढ़ने के लिए हमेशा कुछ न कुछ सच होना चाहिए। जो तुम हो मेरी डायरी
मुझे पता है इसमें लिखी छोटी-छोटी बातें अक्सर चाय की तरह मीठी नहीं होती हैं। इन्हें लिखना ऐसा है जैसे इन पर गर्म पानी डालकर इनकी खुशबू को बाहर निकालना।
मेरे पास 2 डायरी है, जैसे मेरी 2 बहने मैं डायरी में खुद को लिखती हूं मैं अपने आप को सच्चाई से उकेर देती हूँ जैसे जब सूरज की रोशनी तेज़ चमकती है, तो मैं उसकी किरणों के नीचे खड़ा हो होती हूँ और आकाश में उकेरी गई सूरज की किरणों की हर छाप को महसूस करती हूँ
वैसे ही मै तुम्हे देखने में महसूस करने और याद करने की कोशिश करती हूँ।
और सबसे अजीब बात यह है कि जब मैं आखिरकार तुम्हे सबसे छिपना चाहती हूं और फिर भी बैठ जाती हूं लिखना शुरू, मुझे पता चलता है कि मेरे पास इसे छिपाने के लिए हर दिन झेलने वाले संघर्ष के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं है
मैं शायद छुपकर इस डायरी को लिखने की दोषी हूँ। लेकिन —ये सारी भावनाएँ—आखिर कहाँ जाएँगी? जब मैं किसी को कुछ बताने या किसी के साथ साझा करने के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे डर लगता है खुद को कैसे व्यक्त करूं ये सारी भावनाएँ—यहाँ के अलावा और कहाँ जाएँगी?
मेरी सुंदर डायरी लिखने का एक फ़ायदा यह है कि यह कभी भी विषय नहीं बदलती, न ही आपके चुटकुलों को बेतुका समझती है, न ही आपको अपनी बड़ाई करते या शिकायत करते हुए देखती है। और यह कोई लिखने की प्रतियोगिता भी नहीं है, इसलिए कोई दबाव भी नहीं होता। डायरी बस आपको ईमानदार रहने देती है। और मुझे यह बात अच्छी लगती है। 😊मेरी जान मेरी जिंदगी
मेरी प्यारी डायरी प्रिय डायरी,
तुम सुन रही हो ना तुम मेरे लिए बहुत जरूरी हो ,
तुम मेरे हर दिन और विचारों के सम्मेलन में तुम शामिल हो
और मेरी सच्चाई से भी ज्यादा तुम कहीं अधिक रहस्य मय हो,तुम मेरे सपनो के धर्मग्रंथों और किताबों
से भी अधिक प्यारी हो मैं तुम्हारे बिना अपना कल्पना भी नहीं कर सकती तुम मेरी सच्ची दोस्त हो जो मुझे कभी
गलत नहीं समझती है ।
तुम्हारे बिना मेरा एक दिन भी नहीं गुजरता
मै खुद को तुम्हारे बिना सोच भी नहीं सकती हूँ शायद तुम मेरी जरूरत हो जब तक मैं इस दुनियां में रहूंगी तब तक तुम भी साथ रहोगी मेरे मुझे लगता हैं मैं तुम्हारे साथ ही खुद को असली रूप में पाती हूँ इस दुनियां में
कभी-कभी आपकी डायरी ही सबसे अच्छी श्रोता होती है
मैं अपनी डायरी को बिना कभी लिखे और पढ़े बिना कभी सो नहीं पाती हूँ रात में पढ़ने के लिए हमेशा कुछ न कुछ सच होना चाहिए। जो तुम हो मेरी डायरी
मुझे पता है इसमें लिखी छोटी-छोटी बातें अक्सर चाय की तरह मीठी नहीं होती हैं। इन्हें लिखना ऐसा है जैसे इन पर गर्म पानी डालकर इनकी खुशबू को बाहर निकालना।
मेरे पास 2 डायरी है, जैसे मेरी 2 बहने मैं डायरी में खुद को लिखती हूं मैं अपने आप को सच्चाई से उकेर देती हूँ जैसे जब सूरज की रोशनी तेज़ चमकती है, तो मैं उसकी किरणों के नीचे खड़ा हो होती हूँ और आकाश में उकेरी गई सूरज की किरणों की हर छाप को महसूस करती हूँ
वैसे ही मै तुम्हे देखने में महसूस करने और याद करने की कोशिश करती हूँ।
और सबसे अजीब बात यह है कि जब मैं आखिरकार तुम्हे सबसे छिपना चाहती हूं और फिर भी बैठ जाती हूं लिखना शुरू, मुझे पता चलता है कि मेरे पास इसे छिपाने के लिए हर दिन झेलने वाले संघर्ष के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं है
मैं शायद छुपकर इस डायरी को लिखने की दोषी हूँ। लेकिन —ये सारी भावनाएँ—आखिर कहाँ जाएँगी? जब मैं किसी को कुछ बताने या किसी के साथ साझा करने के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे डर लगता है खुद को कैसे व्यक्त करूं ये सारी भावनाएँ—यहाँ के अलावा और कहाँ जाएँगी?
मेरी सुंदर डायरी लिखने का एक फ़ायदा यह है कि यह कभी भी विषय नहीं बदलती, न ही आपके चुटकुलों को बेतुका समझती है, न ही आपको अपनी बड़ाई करते या शिकायत करते हुए देखती है। और यह कोई लिखने की प्रतियोगिता भी नहीं है, इसलिए कोई दबाव भी नहीं होता। डायरी बस आपको ईमानदार रहने देती है। और मुझे यह बात अच्छी लगती है। 😊मेरी जान मेरी जिंदगी
मेरी प्यारी डायरी प्रिय डायरी,
तुम सुन रही हो ना तुम मेरे लिए बहुत जरूरी हो ,
तुम मेरे हर दिन और विचारों के सम्मेलन में तुम शामिल हो
और मेरी सच्चाई से भी ज्यादा तुम कहीं अधिक रहस्य मय हो,तुम मेरे सपनो के धर्मग्रंथों और किताबों
से भी अधिक प्यारी हो मैं तुम्हारे बिना अपना कल्पना भी नहीं कर सकती तुम मेरी सच्ची दोस्त हो जो मुझे कभी
गलत नहीं समझती है ।
तुम्हारे बिना मेरा एक दिन भी नहीं गुजरता
मै खुद को तुम्हारे बिना सोच भी नहीं सकती हूँ शायद तुम मेरी जरूरत हो जब तक मैं इस दुनियां में रहूंगी तब तक तुम भी साथ रहोगी मेरे मुझे लगता हैं मैं तुम्हारे साथ ही खुद को असली रूप में पाती हूँ इस दुनियां में
कभी-कभी आपकी डायरी ही सबसे अच्छी श्रोता होती है
से भी अधिक प्यारी हो मैं तुम्हारे बिना अपना कल्पना भी नहीं कर सकती तुम मेरी सच्ची दोस्त हो जो मुझे कभी
गलत नहीं समझती है ।
तुम्हारे बिना मेरा एक दिन भी नहीं गुजरता
मै खुद को तुम्हारे बिना सोच भी नहीं सकती हूँ शायद तुम मेरी जरूरत हो जब तक मैं इस दुनियां में रहूंगी तब तक तुम भी साथ रहोगी मेरे मुझे लगता हैं मैं तुम्हारे साथ ही खुद को असली रूप में पाती हूँ इस दुनियां में
कभी-कभी आपकी डायरी ही सबसे अच्छी श्रोता होती है
मैं अपनी डायरी को बिना कभी लिखे और पढ़े मुझे पता है इसमें लिखी छोटी-छोटी बातें अक्सर चाय की तरह मीठी नहीं होती हैं। इन्हें लिखना ऐसा है जैसे इन पर गर्म पानी डालकर इनकी खुशबू को बाहर निकालना।
मेरे पास 2 डायरी है, जैसे मेरी 2 बहने मैं डायरी में खुद को लिखती हूं मैं अपने आप को सच्चाई से उकेर देती हूँ जैसे जब सूरज की रोशनी तेज़ चमकती है, तो मैं उसकी किरणों के नीचे खड़ा हो होती हूँ और आकाश में उकेरी गई सूरज की किरणों की हर छाप को महसूस करती हूँ
वैसे ही मै तुम्हे देखने में महसूस करने और याद करने की कोशिश करती हूँ।
और सबसे अजीब बात यह है कि जब मैं आखिरकार तुम्हे सबसे छिपना चाहती हूं और फिर भी बैठ जाती हूं लिखना शुरू, मुझे पता चलता है कि मेरे पास इसे छिपाने के लिए हर दिन झेलने वाले संघर्ष के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं है
मैं शायद छुपकर इस डायरी को लिखने की दोषी हूँ। लेकिन —ये सारी भावनाएँ—आखिर कहाँ जाएँगी? जब मैं किसी को कुछ बताने या किसी के साथ साझा करने के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे डर लगता है खुद को कैसे व्यक्त करूं ये सारी भावनाएँ—यहाँ के अलावा और कहाँ जाएँगी?
मेरी सुंदर डायरी लिखने का एक फ़ायदा यह है कि यह कभी भी विषय नहीं बदलती, न ही आपके चुटकुलों को बेतुका समझती है, न ही आपको अपनी बड़ाई करते या शिकायत करते हुए देखती है। और यह कोई लिखने की प्रतियोगिता भी नहीं है, इसलिए कोई दबाव भी नहीं होता। डायरी बस आपको ईमानदार रहने देती है। और मुझे यह बात अच्छी लगती है। 😊