
हेलो दोस्तों , एक मिनट के लिए खुद को असलियत को देखते है कि क्या है ?
जरा सोचिए कि आपने कितनी बार खुद ये कहा है / वादा किया है कि "भाई, कल से पक्का सुबह 4 बजे उठ कर पढूंगा/ जिम जाऊंगा", और फिर दूसरे दिन सुबह उठने की बजाय 11 A M मे उठ कर 2 से 3 घंटे reels scroll करते हैं?
चिंता मत करो , तुम बस एक इंसान ही हो ।
वैसे आजकल मैं इस बारे में बहुत सोच रही हूं कि अपनी खुद की आदतें बदलना इतना मुश्किल क्यों है , यह पता होते हुए bhi कि हमारे लिए क्या अच्छा है । पता चला , ये हमारी रोज़ की सोच और खुद को बेहतर बनाने के बीच एक बहुत बड़ी लड़ाई है ।
आखिर हमारा दिमाग इतना आलसी क्यों है?
हम पहले इंसानी सोच को समझते है । अब से हजारों वर्ष पहले हमारे पूर्वजों को बस जिंदा रहना था । उनके दिमाग को मेहनत कम करके अपनी उर्जा को बचाना , जो मिले उससे अपना पेट भरना ओर खतरे से बचने के लिए प्रोग्राम किया गया था।
अब की इस जेनरेशन के लोगो का दिमाग बिल्कुल ऐसा हो गया है जैसे गुफाओं में रहने वालों का - लेकिन स्मार्टफोन, फास्ट फूड और Netflix से भरी दुनिया में।
कंफर्ट जोन का चक्कर: हमारी नैचुरल आदत ही हमारा "लेज़ी मोड" है। अगर हमारे दिमाग को मैथ्स का कोई एक सवाल ओर आराम से बैठ कर फ़ोन में गेम्स खेलने में से किसी एक को चुनना पड़े तो हमारा दिमाग फोन में गेम्स खेलना ही चुनेगा । क्योंकि उसे आराम और सरल काम पसंद है ।
दोस्तों का प्रेशर और FOMO: हम तो सोशल जानवर बन ही गए है । इंसानी दिमाग हमें सबके साथ फिट होना सिखाता है। कभी कभी तो हम अपने दोस्तों या किसी और के लिए अपना ही रूटीन खराब कर देते है कि कहीं हम अपने दोस्तो की एक्टिविटी मिस न कर दें।
हकीकत तो यह है कि हमारा डिफ़ॉल्ट दिमाग ये चाहता है कि हम चिल करें, जंक फूड खाते और सोशल मीडिया में टाइम पास करें, reels scroll करें । लेकिन सेल्फ इंप्रूवमेंट इसका बिल्कुल उल्टा है । इसके लिए हमें मेहनत, दर्द और सबसे अहम "सब्र" कि जरूरत होती है । तो अब हम इस कमी को कैसे पूरा करें?
तो फिर इस आलसी दिमाग को सुधारे कैसे?
आप पूरी तरह से तो अपने स्वभाव को नहीं बदल सकते है , लेकिन आप इन 3 हैक को जरूर ट्राई कर सकते हैं। ये 3 आसान ट्रिक्स हैं जो मेरे लिए भी काम कर रहे है :
1. 100% का टारगेट रखना बंद करें और 1% से शुरू करें:
जब भी हम सेल्फ इंप्रूवमेंट के बारे में सोचते है तो रातों रात साधु (बिल्कुल परफेक्ट) बनने की ठान लेते हैं " कल से 4 बजे उठूंगा, 4 से 5 घंटे तो पढूंगा ही , जिम रेगुलर जाऊंगा कल से 3 महीने , कुछ भी बाहर का जंक फूड टाइप नहीं खाऊंगा .....etc!" यह सोचना कभी काम नहीं आता और आपके सिस्टम को shock देता है।
इसके बजाय, 1% रूल ट्राई करें। जैसे आप कितना पढ़ना चाहते है तो आज सिर्फ 2 पेज पढ़ें। अगर आप वर्कआउट करना चाहते हैं, तो 10 पुशअप्स करें। सबकुछ एक साथ करने की बजाय इसे थोड़ा थोड़ा करें और इतना आसान बनाएं कि आपका दिमाग न-न ना कह सके।
2.सिर्फ अपनी विलपावर नहीं, अपने माहौल को ठीक करें:
विलपावर एक स्कैम है, भाई। यह दिन के आखिर तक खत्म हो जाती है। अगर आपका फोन आपकी टेक्स्टबुक के ठीक बगल में है, तो आप उसे उठा लेंगे। हमारा नेचर डिस्ट्रैक्शन के खिलाफ कमजोर है।
तो, माहौल बदलें। पढ़ते समय अपना फोन दूसरे कमरे में रखें। डिस्ट्रैक्शन करने वाले ऐप्स ब्लॉक करें। बुरी आदतों को मुश्किल बनाएं, और अच्छी आदतों को सुपर आसान बनाएं।
3. खुद पर ज़्यादा गुस्सा न करें (गलतियाँ सबसे होती हैं):
हम सब से कभी न कभी चूक हो जाती है। कभी आपका नियम टूटेगा, कभी कोई दिन बहुत बेकार गुज़रेगा, तो कभी आप काम छोड़कर मोबाइल पर कोई सीरीज़ या फिल्म देखने लग जाएँगे। जब ऐसा हो, तो फालतू का पछतावा करके खुद को कोसना बंद करें। यह सोचना कि "मुझसे तो कुछ होगा ही नहीं", सिर्फ एक बहाना है ताकि आप आलस करते रहें। यह बात समझ लें कि गलतियाँ हर इंसान से होती हैं। बस धूल झाड़कर खड़े हो जाइए और अगले दिन से फिर अपने काम में लग जाइए।
चलते-चलते एक आखिरी बात
सेल्फ़-इम्प्रूवमेंट का मतलब एक परफ़ेक्ट रोबोट बनना नहीं है। इसका मतलब बस यह है कि आप कल जैसे थे, उससे थोड़ा बेहतर बनें। हमारा नेचर हमें हमेशा कम्फ़र्ट की ओर खींचेगा, लेकिन हमारी एम्बिशन ही हमें आगे बढ़ाती है।
तो, आज आप जो ठीक करना चाहते हैं, उसमें से एक छोटी सी चीज़ं चुनें, और बस उसे 10 मिनट के लिए करें। कोई बहाना नहीं। चलो शुरू करते हैं! 🚀