ओह!! मेरी, प्यारी अक्टूबर, तुम कैसी हो एक दिन हो गया तुम्हारे आगमन को तुम कैसी हो मेरी प्यारी दोस्त अक्टूबर , मैं एक साल के बाद तुमसे मिल रही हूँ मैने बहुत तुम्हें याद किया ,जैसे ही तुम बारिश के मौसम के बाद आगमन होता है ये मेरी आत्मा को जागृत करता है, तुम्हारी अद्भुत शांति मेरी आत्मा को शरद ऋतु की हवा में लहराते पत्ते की तरह उड़ने के लिए विवश करती है और मेरे दिल को एक अजीब से सकून की उम्मीद जगती है।
मैं सोचती हूं अगर अक्टूबर होता ही नहीं! तो साल का सुनहरा दौर खत्म हो जाता।
हजारों सुनहरे सूर्योदय और धूप भरे आश्चर्य के दिन जो बारिश के बाद चमत्कार लगते हैं वो कैसे होता , मुझे पता है
अक्टूबर कभी हमें निराश नहीं करती वो तो हमेशा की तरह शान्त और सच्चे दिल से बस अपना कर्तव्य निभाती है शायद मैं तुम मै खुद को देखती हूं मुझे तुमसे बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं तुम मेरी सबसे प्रिय महीना हो जो मुझे दिल से पसंद है।
मुझे लगता है जैसे सितंबर तुम्हारा स्वागत करता है,
वैसे मैं भी चाहती हूं कोई मेरा भी स्वागत करे,
मुझे लगता है सारी दुनियां अक्टूबर की एक हल्की, धुंधली दोपहर से खुश होगी एक ऐसा दिन जब हल्के, धुंधले बादल जो दिखने के लिए बहुत ही आकर्षक होगे ,
मैं आशा करती हुं तुम हर साल की तरह इस साल भी सबको सकून दोगी सबको त्यौहारों का पैगाम दोगी?❤️🤗
तुम्हारी दोस्त
M ❤️🤗
Manan