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Sharanya Neogi
आख़िरी कहानी
हर रात हम कुछ कहानियाँ जीते हैं,
कुछ हँसते हैं, कुछ चुपचाप सहते हैं।
किसे पता था उस शाम के बाद,
कुछ पल सिर्फ़ यादों में रहेंगे।
वो बातें, वो हँसी, वो साथ पुराना,
सब बन गया एक अधूरा अफ़साना।
कहानी ख़त्म हुई, पन्ने रह गए,
और हम उन पन्नों में ही रह गए।
काश, उस वक़्त समझ पाते,
कि वो आख़िरी कहानी थी—
जिसे हमने सुना तो था,
पर कभी आख़िरी माना ही नहीं।