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Shri
जो किया है तुमने
वो करने के लायक तो नहीं
भगवान को लूट कर
भगवान के नाम पर, भगवान समझते हों खुदको
क्या तुम्हारा जमीर ही नहीं
मुझे पता है,
भगवान होने का या ना होने का मुझे पता नही है,
पर फिर भी जो तुमने किया
मुझे भगवान की तरफ से बुरा लगा,
पता नहीं मुझे, वो कितना बेबस होगा
जो किसी के लूट के लिए, स्वार्थ के लिए, मोहरा कहूँ या खिलौना कहूँ
जो भी हो, वो बन गया I
आज के इंसान के उसूल कितने नाजुक हैं
नीयत टूटे तार पर बैठी है, थोड़ी सी ताकत आते ही
उलट जाती हैं।
फिर ऐसा राक्षसी रूप लेती है, किसी को नहीं बक्शती।